
हाल ही में अमेरिका से हरप्रीत कौर को भारत वापस भेजे जाने की खबर ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर इससे पहले कितने भारतीय नागरिकों को अमेरिका ने डिपोर्ट किया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने बड़ी संख्या में भारतीयों को वीजा उल्लंघन और अन्य कारणों से वापस भेजा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कई भारतीय नागरिकों ने या तो वीज़ा की समयसीमा का उल्लंघन किया या फिर गैरकानूनी तरीके से वहां रहना जारी रखा। ऐसे मामलों में अमेरिकी प्रशासन सख्त कदम उठाते हुए उन्हें डिपोर्ट कर देता है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में हजारों भारतीयों को अमेरिका से वापस भारत भेजा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी दिनों-दिन और सख्त होती जा रही है। गैरकानूनी प्रवासियों पर निगरानी के लिए अमेरिकी एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। भारतीय नागरिकों का एक बड़ा वर्ग पढ़ाई, नौकरी या बेहतर जीवन की तलाश में अमेरिका जाता है, लेकिन सभी लोगों को वहां स्थायी रूप से बसने का अधिकार नहीं मिलता। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज़ नहीं होते, उन्हें डिपोर्टेशन का सामना करना पड़ता है।
हरप्रीत कौर का मामला भी इसी श्रेणी में आता है। हालांकि, यह भी सच है कि हर बार डिपोर्ट किए गए लोग अपराधी नहीं होते। बहुत से लोग सिर्फ वीजा की अवधि खत्म होने या नियमों की अनदेखी करने की वजह से इस कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसे भारतीय नागरिकों को कानूनी और मानवीय दृष्टिकोण से सहायता प्रदान की जाती है, ताकि उन्हें भारत वापसी के बाद किसी तरह की दिक्कत न हो।
यह आंकड़े भारत सरकार के लिए भी एक चेतावनी की तरह हैं कि युवाओं को विदेश में पढ़ाई या काम के लिए भेजने से पहले उन्हें सही जानकारी दी जाए। कई बार एजेंटों के बहकावे में आकर लोग फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे अमेरिका पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें डिपोर्टेशन झेलना पड़ता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार लगातार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो अमेरिका या किसी अन्य देश से डिपोर्ट किए गए हैं। साथ ही नागरिकों को यह सलाह भी दी गई है कि वे यात्रा से पहले वीजा और इमिग्रेशन नियमों की पूरी जानकारी लें और किसी भी तरह के अवैध रास्ते का सहारा न लें।
अमेरिका से भारतीयों की वापसी का यह सिलसिला दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इमिग्रेशन पॉलिसी में कठोरता बढ़ रही है। ऐसे में भारत सरकार और प्रवासी भारतीयों के बीच जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।



