
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था इस समय कई वैश्विक और क्षेत्रीय दबावों का सामना कर रही है। ईरान युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय तनावों के साथ-साथ दो अन्य प्रमुख कारणों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे देश की सप्लाई चेन और निर्यात-आयात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा कीमतों, उर्वरक आपूर्ति और कृषि उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है।



