
सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों से जुड़े मामलों में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि कुछ परिस्थितियों में पक्षकारों के बीच समझौता होने के बाद भी CBI जांच को नहीं रोका जा सकता। अदालत ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और गंभीर अपराधों की प्रकृति को ध्यान में रखने की बात कही।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि हर मामले को केवल आपसी सहमति या समझौते के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। यदि मामला सार्वजनिक हित, बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी या गंभीर आरोपों से जुड़ा है तो जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।
अदालत की टिप्पणी बिल्डरों और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों के संदर्भ में आई, जहां अक्सर शिकायतों और विवादों के बाद पक्षों के बीच समझौते की स्थिति बन जाती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे समझौतों का असर जांच की जरूरत पर निर्भर करेगा।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि कानून का उद्देश्य केवल पक्षकारों के बीच विवाद खत्म करना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना भी है। गंभीर मामलों में जांच एजेंसी को अपनी जिम्मेदारी निभाने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आरोपी पक्ष समझौते के आधार पर जांच या कार्रवाई रोकने की मांग करते हैं। अदालत ने साफ किया कि हर मामले में ऐसा संभव नहीं होगा।



