UPI चार्ज पर नया अपडेट, ग्राहकों से अतिरिक्त फीस नहीं वसूल सकेंगे दुकानदार

UPI पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर लगने वाले चार्ज को लेकर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। NPCI ने स्पष्ट किया है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ दुकानदार ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। इसके अलावा UPI ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी यूजर्स से पेमेंट करने के लिए कोई प्लेटफॉर्म फीस या अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकती हैं।
NPCI ने 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि संशोधित UPI प्राइसिंग फ्रेमवर्क के तहत MDR चार्ज केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर अधिकतम 0.4 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि, छोटे व्यापारियों और निर्धारित सीमा के भीतर आने वाले लेनदेन को इस शुल्क से छूट दी गई है।
NPCI के मुताबिक, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले सभी UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा, 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को भी जीरो MDR व्यवस्था के तहत राहत दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को केंद्र सरकार, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है। हालांकि, अदालत ने उस समय नए फ्रेमवर्क पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अब NPCI ने अपने हलफनामे में कहा है कि MDR का शुल्क ग्राहकों से वसूलना नियमों के खिलाफ होगा।
ग्राहकों के लिए क्या है इसका मतलब?
NPCI के इस स्पष्टीकरण का मतलब है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों से MDR के नाम पर अलग से पैसे नहीं लिए जा सकते। यदि कोई दुकानदार इस शुल्क को ग्राहक पर डालने की कोशिश करता है, तो संबंधित बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। NPCI ने यह भी कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर UPI सदस्यता और सुविधाएं समाप्त करने तक की कार्रवाई संभव है।
महत्वपूर्ण बात:
फिलहाल MDR फ्रेमवर्क को लेकर कानूनी चुनौती सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। NPCI का हलफनामा उसका पक्ष है, इसे अदालत का अंतिम फैसला नहीं समझना चाहिए।
