
भारत और जापान के बीच होने वाला महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन इस बार गुवाहाटी में आयोजित किया जाएगा, जिसे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम माना जा रहा है। इस आयोजन के लिए असम को चुना जाना केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी रणनीति और विकास दृष्टिकोण शामिल है।
इस समिट का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करना है। जापान पहले से ही भारत के बुनियादी ढांचे, रेलवे और शहरी विकास परियोजनाओं में एक अहम साझेदार रहा है, और अब फोकस पूर्वोत्तर क्षेत्र को नए आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” विज़न के तहत यह कदम पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक रणनीतिक गेटवे के रूप में स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है। असम का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र भूटान, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के करीब स्थित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन से न केवल निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। गुवाहाटी में यह समिट पूर्वोत्तर को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।



