धर्म-आस्था

Bhaum Pradosh Vrat 2025 Katha: भौम प्रदोष व्रत की कथा, विधि और महत्व

ब्रह्मांड के पालनहार भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने के त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का अत्यधिक महत्व बताया गया है, क्योंकि मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, जो साहस, ऊर्जा, भूमि और संकटों के निवारण का कारक ग्रह है। ऐसा विश्वास है कि भौम प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और विशेष रूप से भूमि से जुड़े विवाद, ऋण बाधाएँ तथा शत्रु बाधाओं का नाश होता है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष विधान है। प्राचीन ग्रंथों में भौम प्रदोष की एक पावन कथा बताई गई है, जिसका पाठ आज के दिन अवश्य किया जाना चाहिए।

कथा के अनुसार, एक समय देवताओं और असुरों के बीच भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवताओं की हार निश्चित दिखाई दे रही थी। भयभीत होकर देवगण भगवान शिव की शरण में पहुँचे और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। भगवान शिव ने देवताओं को सांत्वना देते हुए कहा कि वे उचित समय आने पर उनकी रक्षा अवश्य करेंगे। ठीक भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव ने अपने गणों के साथ प्रकट होकर असुरों का संहार किया और देवताओं को विजयी कराया। इसलिए माना जाता है कि भौम प्रदोष के दिन शिवजी अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के हर संकट का निवारण करते हैं।

एक अन्य कथा में वर्णन है कि एक निर्धन ब्राह्मण अत्यधिक दुखों से घिरा हुआ था। उसके जीवन में न धन था, न सुख, और न ही कोई आशा। किसी ज्ञानी साधु ने उसे भौम प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी। ब्राह्मण ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत किया और शिव–पार्वती की भक्ति में लीन हो गया। कुछ ही समय में उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसे धन-समृद्धि, मान-सम्मान और सुख की प्राप्ति होने लगी। यह देखकर गांव के लोगों ने भी भक्ति भाव से यह व्रत आरंभ किया और सबके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे।

इस कथा से यही संदेश मिलता है कि भौम प्रदोष व्रत सिर्फ कठिनाइयों को दूर नहीं करता, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। मंगलवार को शाम के समय शिवजी का रुद्राभिषेक, दीपदान और कथा-पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। जो भक्त श्रद्धा से व्रत रखते हैं, उन्हें मंगल दोष, भूमि संबंधी कष्ट और अनचाहे संकटों से मुक्ति मिलती है। इसलिए आज भौम प्रदोष व्रत की कथा अवश्य पढ़ें और अपने जीवन में शिव कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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