मुख्यमंत्री करेंगे सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता, बजट सत्र 2026–27 के संचालन पर बनेगी रणनीति

वर्ष 2026–27 के विधानसभा बजट सत्र को सुचारु, प्रभावी और परिणाममुखी ढंग से संचालित करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सदन के प्रतिनिधियों और संसदीय कार्य से जुड़े प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। उद्देश्य यही है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए सदन की कार्यवाही बिना व्यवधान के चले और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। सरकार चाहती है कि बजट सत्र के दौरान अधिकतम समय विधायी कार्य, योजनाओं की समीक्षा और विकास से जुड़े प्रस्तावों पर विचार-विमर्श को दिया जाए। इसके लिए विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बेहतर समन्वय बनाना जरूरी माना जा रहा है।
बैठक में सत्र की संभावित अवधि, कार्यसूची, प्रश्नकाल, शून्यकाल और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण जैसे विषयों पर सहमति बनाने का प्रयास होगा। मुख्यमंत्री सभी दलों से सहयोग की अपील कर सकते हैं ताकि जनता से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता के साथ उठाए जाएं और प्रदेश के विकास की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा सकें। पिछले सत्रों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार व्यवधान कम से कम हों, इस पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सर्वदलीय बैठकें लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक होती हैं, जहां मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता खुला रहता है। बजट सत्र सरकार के लिए अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं को सामने रखने का सबसे बड़ा मंच होता है, वहीं विपक्ष को भी अपनी बात रखने और सरकार से जवाब मांगने का अवसर मिलता है। ऐसे में बैठक के जरिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करने की कोशिश रहेगी।
उम्मीद की जा रही है कि सभी दल रचनात्मक सहयोग की भावना से आगे बढ़ेंगे, जिससे सदन की गरिमा बनी रहे और प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला सत्र आयोजित हो सके। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक आगामी बजट सत्र की दिशा और स्वर तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।



