लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की डिजाइन पर सवाल, पैचवर्क नहीं समाधान

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण और सड़क की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़क के कई हिस्सों में धंसाव सामने आने के बाद मरम्मत के लिए पैचवर्क किया जा रहा है, लेकिन बार-बार समस्या आने से इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है। इसके बावजूद कुछ हिस्सों में सड़क फिर धंसने या मरम्मत वाला हिस्सा खराब होने की शिकायत सामने आई है। ऐसे में सिर्फ ऊपरी सतह की मरम्मत को स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सड़क के नीचे की मिट्टी, सबग्रेड, जल निकासी या सड़क की संरचनात्मक परतों में समस्या है, तो केवल ऊपर से डामर डालने से स्थिति लंबे समय तक नहीं सुधरेगी। ऐसे स्थानों पर समस्या की मूल वजह की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
एक संभावित विकल्प प्रभावित हिस्सों की गहन जांच के बाद सड़क की खराब परतों को हटाकर दोबारा मजबूत बेस और उपयुक्त सामग्री के साथ निर्माण करना हो सकता है। जरूरत के अनुसार जल निकासी व्यवस्था और मिट्टी की मजबूती पर भी काम करना पड़ सकता है।
एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजना पर बार-बार सड़क धंसने से यात्रियों की सुरक्षा और सफर की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए मरम्मत के साथ-साथ स्वतंत्र तकनीकी जांच और निर्माण की गुणवत्ता की समीक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है।
लखनऊ और कानपुर के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए यह एक्सप्रेसवे अहम परियोजना है। ऐसे में सड़क की मौजूदा समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, ताकि भविष्य में बार-बार पैचवर्क पर खर्च करने के बजाय टिकाऊ और सुरक्षित सड़क सुनिश्चित की जा सके।



