अपर मुख्य सचिव ने रोग और कीट प्रभावित गन्ना फसल के नुकसान का आकलन कर रोकथाम के दिए कड़े निर्देश
लखनऊ – उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गन्ना एवं चीनी उद्योग) ने राज्य में गन्ना फसल को रोग और कीटों से हो रहे नुकसान का गंभीरता से संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने, नुकसान का सटीक आकलन करने और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के कड़े निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में गन्ना फसल पर विभिन्न प्रकार के रोग और कीटों के हमले की शिकायतें बढ़ी हैं, जिससे किसानों में चिंता का माहौल है।
अपर मुख्य सचिव ने बैठक में स्पष्ट किया कि कृषि एवं गन्ना विकास विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर किसानों से संवाद करें और फसल की वास्तविक स्थिति का पता लगाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे कीट और रोगों की पहचान के लिए विशेषज्ञ टीमों का गठन करें और समय पर दवाओं एवं उपचार के तरीके किसानों तक पहुंचाएं।
गन्ना फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों में लाल सड़न, ऊख मुंहझुला और पत्ती झुलसा रोग शामिल हैं, जबकि कीटों में टॉप शूट बोरर और पायरीला जैसे कीट सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनसे फसल की पैदावार में भारी गिरावट आने का खतरा है। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि रोग एवं कीट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों, जैविक उपायों और रासायनिक दवाओं का संतुलित उपयोग किया जाए, ताकि फसल को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण और जागरूकता शिविरों के माध्यम से रोग और कीट नियंत्रण के उपाय बताए जाएं। इसके साथ ही, प्रभावित किसानों को सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ शीघ्र पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। कृषि विभाग को निर्देशित किया गया है कि वह मौसम के बदलाव और कीट प्रकोप की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पहले से अलर्ट जारी करे।
बैठक में यह भी तय हुआ कि जिलास्तरीय टीम हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट देगी और प्रभावित क्षेत्रों के आंकड़े सीधे शासन को भेजे जाएंगे। अपर मुख्य सचिव ने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से किसानों को नुकसान होता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के प्रतिनिधियों ने इस कदम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि समय रहते उठाए गए ये कदम गन्ना फसल को बड़े नुकसान से बचा लेंगे। गन्ना उत्तर प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल है, जो न केवल किसानों की आय का मुख्य स्रोत है, बल्कि राज्य की चीनी उद्योग की रीढ़ भी है। ऐसे में इसका संरक्षण और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
इस सख्त और त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।



