CM योगी का अनोखा अंदाज: दशहरे पर अदालत लगाई, बुलेटप्रूफ गाड़ी और तलवारों के बीच बोले- आज भी ताड़का-मारीच

गोरखपुर में इस बार दशहरे का पर्व कुछ अलग ही अंदाज में देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने परंपरागत रूप और धार्मिक पहचान को और भी प्रखरता से सामने लाते हुए रामलीला मंचन के दौरान विशेष अदालत लगाई। बुलेटप्रूफ गाड़ी में पहुंचे सीएम योगी ने परंपरागत तलवारें लहराकर जनता का अभिवादन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भी समाज में ताड़का और मारीच जैसे रूप मौजूद हैं, जिनका नाश करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर वर्ष गोरखनाथ मंदिर और रामलीला से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार दशहरे पर उनका अंदाज बिलकुल नया और ऐतिहासिक रहा। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने भगवान राम की परंपरा और मर्यादा का उदाहरण देते हुए कहा कि “त्रेता युग में जैसे बुराइयों के प्रतीक रावण, मारीच और ताड़का का विनाश किया गया, उसी तरह आज के समाज से भी बुराइयों को मिटाने की जरूरत है।”
उनका यह भाषण सिर्फ धार्मिक महत्व तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने इसे सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्यों से भी जोड़कर देखा। योगी ने कहा कि दशहरा केवल रावण दहन का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अच्छाई पर बुराई की जीत और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे धर्म और सत्य के मार्ग पर चलकर समाज को नई दिशा दें।
इस मौके पर भारी सुरक्षा व्यवस्था भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी बुलेटप्रूफ गाड़ी से मंच पर पहुंचे और परंपरागत तलवारों के साथ सुरक्षा घेरे में दिखाई दिए। इसके बावजूद उनका उत्साह और ऊर्जा देखते ही बनती थी। भीड़ में मौजूद हजारों लोग “जय श्रीराम” और “योगी-योगी” के नारों से गूंज उठे।
सीएम योगी ने रामलीला आयोजन समिति की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में संस्कृति और सभ्यता जिंदा रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों से प्रेरणा लेकर नीति निर्माण कर रही है, ताकि समाज में न्याय और धर्म की स्थापना हो सके।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में यह भी जोड़ा कि आज के दौर में ताड़का और मारीच जैसे प्रतीक केवल पौराणिक कथाओं में ही नहीं, बल्कि समाज में विभिन्न रूपों में मौजूद हैं। कभी ये भ्रष्टाचार के रूप में, कभी आतंकवाद के रूप में और कभी नशे व अपराध के रूप में हमारे बीच खड़े होते हैं। इन्हें मिटाना ही असली विजयदशमी का उद्देश्य है।
कार्यक्रम के अंत में रावण दहन हुआ और आसमान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी का यह अलग अंदाज जहां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा, वहीं उनके भाषण ने धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गहरी छाप छोड़ी।



