भारत-चीन सीमा व्यापार पर संकट, तकलाकोट में फंसे भारतीय व्यापारी

भारत-चीन सीमांत व्यापार को लेकर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। करीब छह साल के अंतराल के बाद लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन पारंपरिक व्यापार दोबारा शुरू हुआ, लेकिन तकलाकोट पहुंचे भारतीय व्यापारियों को अपेक्षित सुविधाएं और व्यापारिक माहौल नहीं मिल पाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापार मार्ग बंद रहने के दौरान कुछ भारतीय व्यापारियों का सामान तकलाकोट में ही रह गया था। इसी वजह से शुरुआती दल में ऐसे व्यापारियों को प्राथमिकता दी गई, जिनका सामान वर्ष 2019 के अंतिम व्यापार सत्र के बाद वहां फंसा हुआ था। हालांकि व्यापार दोबारा शुरू होने के बावजूद सामान और व्यापारिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
लिपुलेख मार्ग से व्यापार की बहाली भारत और चीन के सीमांत क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोरोना महामारी के बाद वर्ष 2020 से यह पारंपरिक व्यापार मार्ग बंद था और करीब छह वर्ष बाद इसे फिर खोला गया है।
पहले चरण में 16 भारतीय व्यापारी और चार सहयोगी कर्मचारी बिना सामान के तिब्बत की ओर रवाना हुए थे। चीनी अधिकारियों ने तकलाकोट ट्रेड मार्ट में बुनियादी ढांचे की सीमाओं का हवाला देते हुए शुरुआती दल को 20 लोगों तक सीमित रखा था।
सीमांत व्यापार की बहाली से पिथौरागढ़ के धारचूला और आसपास के व्यापारियों को उम्मीद थी कि लंबे समय से बंद कारोबार को नई गति मिलेगी। पारंपरिक रूप से यह व्यापार स्थानीय अर्थव्यवस्था और सीमावर्ती इलाकों के लोगों की आजीविका से जुड़ा रहा है।
हालांकि मौजूदा स्थिति ने व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तकलाकोट में व्यापारिक व्यवस्थाओं, सामान और आवाजाही से जुड़ी समस्याओं के समाधान को लेकर व्यापारी दोनों देशों की सरकारों से स्पष्ट कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार को दोबारा शुरू करने का फैसला व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में भी अहम है। इसी बीच दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे पर उच्चस्तरीय वार्ता भी जारी है।
कुल मिलाकर, छह साल बाद शुरू हुआ भारत-चीन सीमांत व्यापार अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। तकलाकोट में फंसे भारतीय व्यापारियों और उनके सामान से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब दोनों देशों की ओर से ठोस पहल की जरूरत महसूस की जा रही है।



