उत्तराखंड के 2440 गांवों में बदलेगा लॉ एंड ऑर्डर, धामी सरकार का बड़ा कदम

उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। धामी सरकार ने प्रदेश के 2440 राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के अधिकार क्षेत्र में लाने की दिशा में अगला कदम बढ़ाया है। इसके लिए आवश्यक खाका तैयार किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
अभी कई पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व पुलिस व्यवस्था के तहत कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्य किए जाते हैं। राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लाने से पुलिसिंग की पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव आएगा और नियमित पुलिस तंत्र की भूमिका बढ़ेगी।
सिविल पुलिस के अधिकार क्षेत्र का विस्तार होने से कानून-व्यवस्था, अपराध की रोकथाम और शिकायतों के निस्तारण में बेहतर समन्वय की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पुलिस से जुड़ी सेवाएं अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
इस बदलाव के लिए सरकार को पुलिस व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई पहलुओं पर काम करना होगा। नए क्षेत्रों में पुलिस चौकियों और आवश्यक संसाधनों की जरूरत के अनुसार व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूरस्थ गांवों तक प्रभावी पुलिसिंग पहुंचाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। 2440 राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लाने की योजना इस चुनौती को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ आम लोगों को बेहतर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सिविल पुलिस का क्षेत्र बढ़ने से अपराध नियंत्रण और पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी नई व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है।
आने वाले समय में इस योजना के लागू होने के बाद उत्तराखंड के हजारों ग्रामीण परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। सरकार की ओर से आगे की प्रशासनिक और पुलिस संबंधी तैयारियां पूरी किए जाने के बाद इन गांवों में कानून-व्यवस्था की नई व्यवस्था लागू हो सकती है।



