नैनीताल की 3.6 मीटर दूरबीन से खुलेंगे ब्रह्मांड के रहस्य

नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) की देवस्थल वेधशाला में खगोलीय अनुसंधान का नया चरण शुरू होने जा रहा है। यहां स्थापित 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप से 8 अक्टूबर से ग्रह-नक्षत्रों का अवलोकन किया जाएगा। मानसून के बाद हर वर्ष अक्टूबर में इस दूरबीन से नियमित आब्जर्वेशन शुरू किए जाते हैं।
इस बार भारत के साथ बेल्जियम के वैज्ञानिक भी पहले चरण के अवलोकन में शामिल होंगे। अगले चार महीनों का शेड्यूल तैयार किया गया है, जिसमें कई वैज्ञानिक विभिन्न खगोलीय विषयों पर अध्ययन करेंगे। शोध में ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं, बाहरी ग्रहों और तारों में होने वाले विस्फोट जैसी घटनाएं शामिल हैं।
दूरबीन में लगे आधुनिक उपकरणों की मदद से तारों और आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश का स्पेक्ट्रम प्राप्त किया जा सकता है। इसके जरिए वैज्ञानिक किसी खगोलीय पिंड में मौजूद रासायनिक तत्वों और उसकी भौतिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
देवस्थल की 3.6 मीटर दूरबीन भारत-बेल्जियम वैज्ञानिक सहयोग का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ARIES के अनुसार यह भारत में आकाशीय पिंडों के ऑप्टिकल अध्ययन के लिए राष्ट्रीय सुविधा है और 2016 में इसे शुरू किया गया था।
इस वर्ष वैज्ञानिक दूसरे सौरमंडल से आए धूमकेतु 3I/ATLAS का भी अध्ययन करेंगे। इसके अलावा पिछले वर्षों में इस दूरबीन से क्वेसार, सुपरनोवा, गामा-रे बर्स्ट, ब्लैक होल और युवा तारों समेत कई खगोलीय पिंडों का अवलोकन किया जा चुका है।



