लस्सी की दुकान का आया 65.40 लाख रुपये का बिजली बिल, स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बिजली बिल का एक अनोखा मामला सामने आया है। मटर गली में लस्सी की दुकान चलाने वाले व्यापारी जसवीर सिंह को एक महीने का बिजली बिल 65 लाख 40 हजार रुपये मिला है। इतनी बड़ी रकम देखकर व्यापारी परिवार के होश उड़ गए। दुकान का नाम ‘जस्सी दी लस्सी’ है। परिवार का कहना है कि अब तक बिजली के सभी बिलों का भुगतान समय पर किया जाता रहा है।
स्मार्ट मीटर लगने के बाद आया भारी-भरकम बिल
व्यापारी के बेटे जसपाल सिंह के अनुसार, दुकान में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद करीब एक महीने का बिजली बिल 65.40 लाख रुपये आया। उन्होंने इस बारे में मटर गली व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष दलजीत सिंह दल्ली को जानकारी दी। परिवार का कहना है कि दुकान की सामान्य बिजली खपत के हिसाब से इतनी बड़ी रकम का बिल समझ से परे है।
बिल देखकर मानसिक तनाव में व्यापारी परिवार
एक छोटी व्यावसायिक दुकान के लिए लाखों रुपये का बिजली बिल आने से परिवार काफी परेशान है। जसपाल सिंह ने बताया कि उनका परिवार नियमित रूप से बिजली बिल जमा करता रहा है। ऐसे में अचानक 65.40 लाख रुपये का बिल मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवार ने विद्युत विभाग से जल्द मामले की जांच कराने की मांग की है।
व्यापारी एसोसिएशन ने विद्युत विभाग से की शिकायत
मामले की जानकारी मिलने के बाद मटर गली व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष दलजीत सिंह दल्ली ने विद्युत विभाग के जेई साकेब से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इसके बाद एसोसिएशन के अध्यक्ष दलजीत सिंह दल्ली और महामंत्री अतुल कुमार गुप्ता ने विभाग के महाप्रबंधक, एसडीओ और कनिष्ठ अभियंता समेत अन्य अधिकारियों से हस्तक्षेप करने की मांग की।
स्मार्ट मीटर की उच्चस्तरीय जांच की मांग
व्यापारी एसोसिएशन ने इस मामले में स्मार्ट मीटर की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। एसोसिएशन का कहना है कि बिजली बिल में यदि कोई तकनीकी या गणना संबंधी गड़बड़ी हुई है तो उसे जल्द ठीक किया जाना चाहिए। साथ ही उपभोक्ता को वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी किया जाए।
अब विद्युत विभाग की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल इस असामान्य बिजली बिल को लेकर व्यापारी परिवार और स्थानीय व्यापारियों की नजर विद्युत विभाग की कार्रवाई पर है। विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि 65.40 लाख रुपये का बिल किस वजह से आया। तब तक परिवार ने बिल में सुधार कर राहत देने की मांग की है।
नोट: 65.40 लाख रुपये का आंकड़ा समाचार रिपोर्ट में बताए गए बिल का है। इसे दुकान की वास्तविक बिजली खपत या अंतिम देय राशि की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।



