
जुलाई 2025 को वैश्विक तापमान के लिहाज से इतिहास में दर्ज किया गया है, क्योंकि यह अब तक का दुनिया का तीसरा सबसे गर्म महीनाबन चुका है। यह जानकारी यूरोपीय यूनियन की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष जुलाई में औसत वैश्विक तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक स्तर की ओर बढ़ने के संकेत देता है।
कोपरनिकस की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2025 का औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के औसत से लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यह आंकड़ा पेरिस जलवायु समझौते में तय की गई सीमा के बेहद करीब है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर का खतरा नहीं, बल्कि हमारे सामने खड़ी सच्चाई बन चुका है।
यूरोपीय यूनियन ने इस रिपोर्ट के साथ एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में तापमान में और तेजी से वृद्धि हो सकती है, जिससे जलवायु से जुड़ी प्राकृतिक आपदाएं, जैसे हीटवेव, सूखा, बाढ़ और जंगलों में आग की घटनाएं और बढ़ेंगी।
इस वर्ष जुलाई में दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई। अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य पूर्व के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। भारत और दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में भी गर्मी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मानवजनित गतिविधियों के कारण हो रही है, जिनमें सबसे प्रमुख हैं – कोयले, पेट्रोल और डीज़ल का अत्यधिक इस्तेमाल, वनों की कटाई, और औद्योगिक प्रदूषण।
यूरोपीय यूनियन ने सभी देशों से अपील की है कि वे कार्बन उत्सर्जन को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने, और जलवायु अनुकूल नीतियां बनाने की दिशा में तुरंत कदम उठाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर समय रहते सख्त फैसले नहीं लिए गए, तो आने वाले दशक में हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
साथ ही, रिपोर्ट में आम नागरिकों को भी जलवायु जागरूकता अपनाने और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह दी गई है, जैसे – वाहनों का कम उपयोग, ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक का परहेज, और वृक्षारोपण।
जुलाई 2025 का यह रिकॉर्ड स्पष्ट करता है कि अब केवल चेतावनियों का समय नहीं है, बल्कि कार्रवाई करने का समय है। जलवायु संकट एक वैश्विक चुनौती है, जिसका समाधान भी वैश्विक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से ही संभव है।



