
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुके हैं। इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह गाजा पट्टी पर हमास के नियंत्रण को पूरी तरह खत्म करने जा रहा है और इसके बाद गाजा को किसी अरब देश की सेना को सौंपने की योजना पर काम कर रहा है। यह घटनाक्रम क्षेत्रीय भू-राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है और दशकों पुराने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को एक नए मोड़ पर ले जा सकता है।
इजरायल की सेना (IDF) ने हाल के हफ्तों में गाजा में हमास के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियान तेज कर दिया है। गाजा के उत्तरी और मध्य हिस्सों में कई हमास ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है और अब दक्षिणी हिस्सों में ऑपरेशन चल रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि,
“हम गाजा में हमास की शासन व्यवस्था को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारे सैनिक अंतिम लक्ष्य तक तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक हमास का नामो-निशान मिटा नहीं देते।”
इजरायली रणनीति के तहत, गाजा में स्थायी सैन्य कब्जा स्थापित करने की बजाय, वहां से हमास का सफाया कर के शासन को किसी अरब गठबंधन सेना या अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण में काम करने वाले प्रशासन को सौंपने की योजना बनाई जा रही है। इस प्रस्ताव को लेकर इजरायल ने मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब जैसे देशों के साथ बातचीत भी शुरू की है।
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में स्थायित्व और सुरक्षा बहाली के लिए जरूरी है, ताकि भविष्य में गाजा से इजरायल पर फिर कभी हमले न हो सकें। वहीं, हमास को भी इस योजना की भनक लग चुकी है और उसने अपने समर्थकों से ‘आखिरी सांस तक लड़ने’की अपील की है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इजरायल हमास को पूरी तरह खत्म कर देता है और गाजा को किसी अरब सेना को सौंपता है, तो इससे फिलिस्तीन के राजनीतिक ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा। यह प्रक्रिया फिलिस्तीनी अथॉरिटी के लिए भी चुनौती बन सकती है, जो खुद गाजा पर नियंत्रण की कोशिश लंबे समय से कर रही है।
हालांकि, इस योजना की सफलता कई शर्तों पर निर्भर करती है –
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अरब देशों की स्वीकृति और भागीदारी
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गाजा की जनता का समर्थन
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हमास के बाद संभावित सत्ता शून्य को कैसे भरा जाएगा
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अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय यूनियन ने इस योजना को लेकर चिंता जाहिर की है और कहा है कि गाजा में स्थायित्व तभी आएगा जब वहां स्थानीय नेतृत्व और जनता की सहमति से शासन स्थापित किया जाए, न कि बाहरी हस्तक्षेप से।
वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि इजरायल गाजा में निर्णायक सैन्य कार्रवाई के अंतिम चरण में है और उसका लक्ष्य अब केवल जवाबी हमला नहीं, बल्कि स्थायी समाधान खोजना है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अरब दुनिया और अंतरराष्ट्रीय ताकतें इस बदलाव पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।



