
भारतीय रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड में उद्योग और तकनीक क्षेत्र से जुड़े दो प्रमुख चेहरों की एंट्री हुई है। केंद्र सरकार ने महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को एक बार फिर पार्ट-टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनका नया कार्यकाल 20 अगस्त 2026 से चार साल के लिए है।
पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ को भी RBI के सेंट्रल बोर्ड में पार्ट-टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर बनाया गया है। उनकी नियुक्ति भी 20 अगस्त 2026 से चार साल के लिए प्रभावी है। अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उनका बोर्ड में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आनंद महिंद्रा इससे पहले जून 2022 में RBI के सेंट्रल बोर्ड में नियुक्त हुए थे। अब उन्हें दोबारा चार साल का कार्यकाल दिया गया है। उनकी वापसी से बोर्ड में उद्योग और कारोबारी क्षेत्र का अनुभव बना रहेगा।
एस. सोमनाथ जनवरी 2025 में ISRO चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हुए थे। RBI बोर्ड में उनकी नियुक्ति से तकनीक, विज्ञान और इनोवेशन से जुड़ा अनुभव केंद्रीय बैंक के शीर्ष बोर्ड तक पहुंचेगा।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने जनमेजय कुमार सिन्हा, सैयद अकबरुद्दीन और एनी जॉर्ज मैथ्यू को भी RBI सेंट्रल बोर्ड में पार्ट-टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर नियुक्त किया है। इन तीनों का कार्यकाल 24 अगस्त 2026 से चार साल का होगा।
जनमेजय कुमार सिन्हा BCG India Practice के चेयरमैन हैं, जबकि सैयद अकबरुद्दीन पूर्व राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि रह चुके हैं। एनी जॉर्ज मैथ्यू वित्त मंत्रालय में पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी (एक्सपेंडिचर) रही हैं। इन नियुक्तियों से बोर्ड में वित्त, रणनीति, कूटनीति और प्रशासन का अनुभव भी बढ़ेगा।
RBI सेंट्रल बोर्ड केंद्रीय बैंक के कामकाज की निगरानी और नीतिगत मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नए सदस्यों के शामिल होने से बोर्ड में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का अनुभव और दृष्टिकोण जुड़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर RBI बोर्ड के पुनर्गठन में आनंद महिंद्रा की वापसी और एस. सोमनाथ की नियुक्ति खास तौर पर चर्चा में है। एक ओर महिंद्रा का कारोबारी अनुभव है, वहीं सोमनाथ तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र की विशेषज्ञता लेकर बोर्ड में पहुंचे हैं।



