राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission – NMC) ने देशभर के सभी चिकित्सा संस्थानों को 12 अगस्त को “एंटी-रैगिंग डे” (Anti-Ragging Day) के रूप में मनाने की सिफारिश की है। यह कदम रैगिंग जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के प्रति जागरूकता फैलाने और मेडिकल छात्रों के बीच एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगात्मक माहौल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एनएमसी की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि चिकित्सा संस्थानों को न केवल 12 अगस्त को एंटी-रैगिंग दिवस के रूप में मनाना है, बल्कि 12 से 18 अगस्त तक एंटी-रैगिंग जागरूकता सप्ताह (Anti-Ragging Awareness Week) भी आयोजित करना होगा। इस दौरान संस्थानों को विविध कार्यक्रम, वर्कशॉप, पोस्टर प्रदर्शनी, छात्र संवाद और ओथ (शपथ) कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को रैगिंग के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना होगा।
एनएमसी का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब देश के कई प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में रैगिंग की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने न केवल संस्थानों की छवि को प्रभावित किया है, बल्कि छात्रों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एनएमसी का मानना है कि रैगिंग जैसी प्रथा से छात्रों का आत्मविश्वास टूटता है और कई बार यह आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाओं का कारण बन सकती है।
एनएमसी ने यह भी कहा है कि सभी मेडिकल कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रैगिंग के खिलाफ बनाए गए कानूनों और गाइडलाइनों का कड़ाई से पालन हो। संस्थानों में एंटी-रैगिंग कमेटी, एंटी-रैगिंग स्क्वॉड और मॉनिटरिंग सेल्स सक्रिय रूप से काम करें और नए छात्रों के लिए “मेंटॉरिंग प्रोग्राम” भी शुरू किया जाए जिससे उन्हें सीनियर छात्रों का सहयोग मिल सके, न कि डर।
इसके अलावा, एनएमसी ने सभी संस्थानों को सलाह दी है कि एंटी-रैगिंग जागरूकता सप्ताह की गतिविधियों की फोटो, वीडियो और रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड की जाए ताकि इसकी निगरानी की जा सके और संस्थानों की प्रतिबद्धता स्पष्ट हो।
छात्र संगठनों, अभिभावकों और शिक्षकों ने एनएमसी के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि हर साल इस तरह से नियोजित तरीके से जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो रैगिंग की घटनाओं में निश्चित रूप से कमी लाई जा सकती है।
अंततः, एंटी-रैगिंग डे केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक संकल्प का दिन होना चाहिए – ऐसा संकल्प जिसमें हर छात्र, शिक्षक और संस्था यह ठान ले कि मेडिकल शिक्षा का वातावरण भयमुक्त, प्रेरणादायक और गरिमामयी होगा। एनएमसी का यह प्रयास उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।



