महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोवा में आयोजित राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ (National OBC Federation) के अधिवेशन को संबोधित करते हुए ओबीसी समाज के अधिकारों और उनकी सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी को लेकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जताई। यह अधिवेशन ओबीसी समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण पर केंद्रित था, जिसमें देशभर से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
फडणवीस ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें ओबीसी समुदाय को उनका हक दिलाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि “ओबीसी समाज को सशक्त किए बिना देश में समावेशी विकास संभव नहीं है। हमारी सरकार ने हमेशा सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहेगी।”
उन्होंने इस मंच से यह भी कहा कि सरकार ओबीसी वर्ग के लिए न केवल आरक्षण को बनाए रखने के लिए कृतसंकल्प है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी उनकी सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने ओबीसी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को तेज़ी से पूरा करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है ताकि उन्हें सभी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित रूप से मिल सके।
अधिवेशन के दौरान ओबीसी महासंघ की ओर से शिक्षा, नौकरियों में प्रतिनिधित्व, राजनीतिक आरक्षण और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए। इन सभी मुद्दों पर फडणवीस ने सहमति जताई और कहा कि इन बिंदुओं को सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।
फडणवीस ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि ओबीसी समाज केवल मतदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त शक्ति है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा और उद्यमिता में आगे आएं, क्योंकि आत्मनिर्भर ओबीसी समाज ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
अधिवेशन के समापन सत्र में उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि जो मांगें महासंघ द्वारा प्रस्तुत की गई हैं, उन्हें उचित मंच पर रखा जाएगा और नीति के स्तर पर जरूरी बदलावों के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस अधिवेशन को न केवल ओबीसी समाज की एकता और जागरूकता का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि यह राजनीतिक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि सरकार अब ओबीसी हितों को लेकर और अधिक सजग और सक्रिय भूमिका में है। फडणवीस का यह संदेश स्पष्ट करता है कि सामाजिक न्याय अब केवल नारे की बात नहीं रही, बल्कि शासन की प्राथमिक दिशा बन चुकी है।



