अखिलेश से पहले पहुंचे योगी आदित्यनाथ, अवंती बाई को दी श्रद्धांजलि | BJP बनाम SP राजनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार का दिन खास रहा जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से पहले अवंती बाई के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुंच गए। कार्यक्रम स्थल पर अखिलेश यादव का आगमन सुबह 10 बजे तय था, लेकिन उससे पहले ही भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं का जमावड़ा लग गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महारानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अवंती बाई ने मातृभूमि की रक्षा के लिए जिस तरह से ब्रिटिश हुकूमत का डटकर सामना किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से इस आयोजन ने सियासी तापमान बढ़ा दिया। समाजवादी पार्टी जहां इसे अपना कार्यक्रम मान रही थी, वहीं भाजपा ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीरांगनाओं को लेकर उसकी प्रतिबद्धता पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। योगी आदित्यनाथ का निर्धारित समय से पहले पहुंचना और श्रद्धांजलि अर्पित करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भाजपा जनता को यह दिखाना चाहती है कि वह हर अवसर पर नायकों के बलिदान का सम्मान करती है।
दूसरी ओर, अखिलेश यादव जब कार्यक्रम में पहुंचे, तो तब तक भाजपा के नेता अपनी मौजूदगी दिखा चुके थे। इसे लेकर दोनों दलों के समर्थकों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। भाजपा के नेताओं ने इसे “समर्पण और सम्मान की राजनीति” बताया, जबकि सपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह केवल राजनीतिक अंक जुटाने का प्रयास है।
कुल मिलाकर, अवंती बाई को श्रद्धांजलि देने का यह अवसर केवल एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि उसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच प्रतिस्पर्धा को और अधिक स्पष्ट कर दिया। वीरांगना अवंती बाई के बलिदान पर दोनों दलों की ओर से सम्मान प्रकट करना सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके साथ-साथ सियासी निहितार्थ भी साफ तौर पर झलकते हैं।



