
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पहले प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जाना भारतीय राजनीति और विशेष रूप से दिल्ली की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। मल्होत्रा न केवल भाजपा के शुरुआती दौर के स्तंभों में से एक थे बल्कि उन्होंने दिल्ली की सियासत को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाई। वे पांच बार सांसद रहे और कई बार विधानसभा सदस्य भी बने।
विजय कुमार मल्होत्रा का राजनीतिक जीवन बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने 1977 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस नेता और बाद में प्रधानमंत्री बने डॉ. मनमोहन सिंह को हराकर इतिहास रच दिया था। यह जीत उस दौर में कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देने वाली बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। इसके बाद मल्होत्रा ने भारतीय जनता पार्टी और उसके पूर्ववर्ती संगठन जनसंघ के साथ लंबी राजनीतिक यात्रा तय की।
वे दिल्ली के पहले भाजपा अध्यक्ष बने और पार्टी संगठन को खड़ा करने में उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने दिल्ली में मजबूत पकड़ बनाई और जनता के बीच अपनी नीतियों को लेकर पैठ बनाई। मल्होत्रा को उनकी साफ-सुथरी छवि, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक दूरदर्शिता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
राजनीति के अलावा भी वे सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों से जुड़े रहे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे और शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। अपने जीवनकाल में वे हमेशा सिद्धांतों पर टिके रहे और पार्टी व समाजहित को सर्वोपरि माना।
उनके निधन पर भाजपा नेताओं, विपक्षी दलों और दिल्ली की जनता ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। भाजपा के लिए विजय कुमार मल्होत्रा का जीवन संघर्ष, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा का आदर्श उदाहरण रहेगा।
93 वर्ष की उम्र में उनका यूं जाना एक युग का अंत है। आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें दिल्ली में भाजपा की नींव रखने वाले नेता और लोकतांत्रिक मूल्यों के सच्चे प्रहरी के रूप में याद करेंगी।



