
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना को 100 साल पूरे होने जा रहे हैं और इस ऐतिहासिक अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देश में सात बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संघ ने अपनी शताब्दी वर्षगांठ को एक महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसमें स्वयंसेवक घर-घर जाकर संगठन के विचारों, कार्यों और राष्ट्रहित में उसके योगदान की जानकारी देंगे। इस दौरान लोगों को बताया जाएगा कि कैसे संघ ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्रनिर्माण तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों के जरिए समाज को मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है।
इन सात प्रमुख कार्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक विभिन्न गतिविधियाँ शामिल होंगी। आरएसएस के स्वयंसेवक अलग-अलग शहरों और गांवों में पहुंचकर समाज के हर वर्ग से संवाद करेंगे। विशेष रूप से युवाओं और नई पीढ़ी तक संघ का संदेश पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी इस अवसर पर न केवल देशभर के कार्यक्रमों में शामिल होंगे, बल्कि विदेश यात्राओं पर जाकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय और वैश्विक स्तर पर संघ की सोच और दृष्टि को साझा करेंगे।
यह कार्यक्रम केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, पर्यावरण, ग्राम विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ा रहेगा। संघ मानता है कि राष्ट्रनिर्माण केवल विचारधारा के प्रचार से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्यों से संभव है। इसी कारण आरएसएस के स्वयंसेवक इस शताब्दी उत्सव के दौरान बड़े पैमाने पर सेवा कार्यों और सामाजिक जागरूकता अभियानों को भी आगे बढ़ाएंगे।
आरएसएस की यह पहल एक ओर जहां उसके 100 साल की यात्रा को यादगार बनाएगी, वहीं दूसरी ओर आने वाले समय में संगठन की दिशा और दृष्टि को भी स्पष्ट करेगी। घर-घर जाकर संघ का परिचय कराने और समाज के साथ सीधा जुड़ाव स्थापित करने का यह अभियान भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।



