
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी रैली 2025 को संबोधित करते हुए कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे। हर साल की तरह इस बार भी संघ की यह परंपरागत रैली राष्ट्रीय और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनी। अपने भाषण में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, पहलगाम आतंकी हमले, आर्थिक नीतियां और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
पहलगाम हमले पर चिंता
भागवत ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए समाज और सरकार दोनों को मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी। भागवत ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे एकजुट रहकर आतंकी गतिविधियों का विरोध करें और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाएं।
टैरिफ और आर्थिक चुनौतियां
भाषण में उन्होंने वैश्विक व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उनका कहना था कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते हुए देश को अपने उद्योगों और किसानों की रक्षा करनी होगी। भागवत ने कहा कि टैरिफ नीति को इस तरह संतुलित करना होगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बने और आम नागरिक को राहत मिले। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को प्राथमिकता देनी होगी।
प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता
हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इन संकटों से निपटने के लिए केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को सजग और सक्रिय रहना होगा। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे आपदा प्रबंधन में सरकार का सहयोग करें और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सामाजिक एकता और संस्कृति पर जोर
भागवत ने अपने भाषण में कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति और सामाजिक एकता में निहित है। उन्होंने युवाओं को भारतीय परंपराओं और मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उनका कहना था कि आधुनिकता और विज्ञान के साथ-साथ समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा।
निष्कर्ष
मोहन भागवत का यह भाषण राष्ट्रीय मुद्दों और सामाजिक जिम्मेदारी का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। पहलगाम हमले पर कठोर रुख, टैरिफ नीति पर संतुलन की मांग और प्राकृतिक आपदाओं में समाज की भूमिका पर जोर उनके विचारों की गंभीरता को दर्शाता है। विजयादशमी रैली एक बार फिर इस संदेश के साथ समाप्त हुई कि भारत की प्रगति और सुरक्षा के लिए एकजुटता, आत्मनिर्भरता और संस्कार ही सबसे बड़ा आधार हैं।



