
भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका की सराहना करते हुए इसे एक “पवित्र और विशाल वट वृक्ष” की उपमा दी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वट वृक्ष अपनी छाया में सबको एकजुट करता है और लंबे समय तक अपनी जड़ों से स्थिरता प्रदान करता है, उसी प्रकार आरएसएस भी भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक धारा को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। कोविंद का यह बयान संगठन की उस मूल भावना को उजागर करता है, जो “सर्वे भवंतु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत पर आधारित है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संगठन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान करना था। आज लगभग एक सदी बाद, आरएसएस भारत के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में गिना जाता है, जिसके लाखों स्वयंसेवक शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, आपदा प्रबंधन और सेवा कार्यों में योगदान दे रहे हैं।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि आरएसएस केवल एक संगठन नहीं, बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली और विचारधारा है जो हर वर्ग, हर समुदाय और हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ने का कार्य करती है। जिस प्रकार वट वृक्ष की जड़ें धरती में गहराई तक फैली होती हैं और उसकी शाखाएं आसमान तक जाती हैं, उसी तरह संघ भी समाज की गहराइयों तक अपनी पहुंच बनाए हुए है और राष्ट्र की ऊँचाइयों तक भारत को ले जाने का संकल्प लिए हुए है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संघ का सबसे बड़ा बल इसका अनुशासन और संगठन कौशल है। देशभर में शाखाओं के माध्यम से आरएसएस ने यह साबित किया है कि जब लोग एक ध्येय और राष्ट्रहित के लिए एकजुट होते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार किया जा सकता है।
आज आरएसएस केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा सहित कई देशों में संघ से प्रेरित संगठन कार्यरत हैं, जो भारतीय समुदाय को जोड़ते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।
रामनाथ कोविंद का यह कथन स्पष्ट करता है कि आरएसएस की पहचान केवल एक धार्मिक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन है। संघ ने शिक्षा से लेकर पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास तक अनेक क्षेत्रों में योगदान दिया है।
संक्षेप में, कोविंद का संदेश यह है कि जैसे वट वृक्ष अपनी विशाल छत्रछाया में सबको आश्रय देता है और सैकड़ों वर्षों तक खड़ा रहता है, उसी प्रकार आरएसएस भी राष्ट्र की आत्मा को मजबूत बनाते हुए भारतीय समाज को एकजुट रखने का कार्य करता रहेगा।



