पादरी बनते-बनते बन गया तेज गेंदबाज, 24 साल बाद भी कायम है ये विश्व रिकॉर्ड

दुनिया के क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से खेल को नई दिशा दी। ऐसा ही एक नाम है ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज शॉन टैट (Shaun Tait) या ब्रेट ली या शोएब अख्तर, जिनकी रफ्तार ने बल्लेबाजों के होश उड़ा दिए। दिलचस्प बात यह है कि यह खिलाड़ी बचपन में पादरी (Pastor) बनने की तैयारी कर रहा था, लेकिन किस्मत ने उसे क्रिकेट की पिच पर ला खड़ा किया, जहां उसने इतिहास रच दिया। उनकी गेंदबाजी इतनी तेज थी कि दुनिया के सबसे बड़े बल्लेबाज भी उनके सामने टिक नहीं पाते थे।
इस खिलाड़ी ने अपनी तेज रफ्तार से ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज 24 साल बाद भी नहीं टूटा है। 2001 में पाकिस्तान के शोएब अख्तर ने 161.3 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी, जो आज तक क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद मानी जाती है। शोएब को बचपन से ही धर्म और अध्यात्म में रुचि थी, लेकिन उनके गांव में जब उन्होंने पहली बार टेप बॉल से गेंद फेंकी, तो सबने उनकी गति देखकर हैरानी जताई। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को ही अपना जीवन बना लिया।
शोएब अख्तर को “रावलपिंडी एक्सप्रेस” के नाम से जाना जाता है। उनकी रफ्तार ने 90 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में बल्लेबाजों को परेशान कर दिया था। सचिन तेंदुलकर, रिकी पोंटिंग और ब्रायन लारा जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी उनके स्पेल के दौरान सतर्क रहते थे। उन्होंने पाकिस्तान के लिए 46 टेस्ट, 163 वनडे और 15 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले और हजारों बल्लेबाजों को अपनी रफ्तार से हैरान किया।
आज भी जब क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की बात होती है, तो शोएब अख्तर का नाम सबसे ऊपर आता है। नए खिलाड़ी जैसे मिचेल स्टार्क, जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड उनकी गति तक पहुंचने की कोशिश जरूर करते हैं, लेकिन कोई अब तक उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सका। यह कहानी साबित करती है कि इंसान की किस्मत किस दिशा में मोड़ लेगी, यह कोई नहीं जानता — कभी पादरी बनने का सपना देखने वाला युवक आज क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज गेंदबाज कहलाता है।



