
प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच आज होने वाली शिखर वार्ता पर दोनों देशों की निगाहें टिकी हुई हैं। पिछले कुछ समय से भारत और कनाडा के संबंधों में आई तल्खी के बाद यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। कूटनीतिक तनाव, आपसी आरोप-प्रत्यारोप और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच यह मुलाकात रिश्तों को दोबारा संतुलित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। जानकारों का मानना है कि दोनों नेता आपसी विश्वास बहाली, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को फिर से मजबूत करने पर जोर देंगे।
भारत और कनाडा के बीच शिक्षा, निवेश, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। हजारों भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि आईटी और स्टार्टअप सेक्टर में भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है। हालिया विवादों के चलते वीजा सेवाओं और व्यापारिक वार्ताओं पर असर पड़ा था, जिससे दोनों देशों के कारोबारी और छात्र समुदाय प्रभावित हुए। ऐसे में यह शिखर वार्ता न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में खालिस्तान से जुड़े मुद्दों, सुरक्षा चिंताओं और कानून के शासन पर खुलकर चर्चा हो सकती है। भारत लगातार अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है, वहीं कनाडा ने भी अपने लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला दिया है। ऐसे में कूटनीतिक संतुलन और परस्पर सम्मान के आधार पर आगे बढ़ने की रणनीति पर सहमति बनना जरूरी होगा।
इसके अलावा व्यापार समझौते (FTA) पर रुकी बातचीत को दोबारा शुरू करने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि दोनों देश आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देते हैं तो कृषि, क्लीन एनर्जी, खनिज संसाधन और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए अवसर खुल सकते हैं। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत साझेदारी दोनों के हित में मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी और मार्क कार्नी की यह शिखर वार्ता केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि संबंधों में जमी बर्फ पिघलाने का अवसर है। यदि संवाद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है तो आने वाले समय में भारत-कनाडा रिश्ते फिर से मजबूती के साथ पटरी पर लौट सकते हैं और दोनों देशों के नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।



