
सरकार ने ITI प्रशिक्षुओं को अधिक कुशल और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए ऑन द जॉब ट्रेनिंग (OJT) व्यवस्था को और सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रशिक्षण के दौरान इंडस्ट्री मेंटर सीधे तौर पर प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन करेंगे, जिससे उन्हें वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव और व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा। इस पहल का उद्देश्य केवल सर्टिफिकेट देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार करना है। अक्सर देखा जाता था कि आईटीआई से पास आउट होने वाले कई छात्र सैद्धांतिक रूप से तो सक्षम होते हैं, लेकिन उद्योग में काम करने के लिए आवश्यक व्यवहारिक कौशल में कमी रह जाती है। नई व्यवस्था के तहत उद्योग विशेषज्ञ प्रशिक्षुओं की कार्यक्षमता, समय प्रबंधन, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क जैसी क्षमताओं का आकलन करेंगे। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को अपनी कमियों को समझकर उन्हें सुधारने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि जब उद्योग स्वयं मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा तो प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी कम होगी। यह कदम “स्किल इंडिया” जैसे अभियानों को भी मजबूती देगा और स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित व तैयार मानव संसाधन उपलब्ध कराएगा। साथ ही, इससे प्रशिक्षुओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें प्रशिक्षण के दौरान ही रोजगार के अवसर मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह पहल आईटीआई शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जो देश के युवाओं को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।



