
तुलसी गबार्ड का बड़ा खुलासा: वुहान लैब फंडिंग पर फिर छिड़ा विवाद
अमेरिकी डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी वैज्ञानिकों और संस्थानों ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को कोविड-19 से जुड़ी रिसर्च के लिए करोड़ों डॉलर की फंडिंग दी थी।
उनके अनुसार यह फंडिंग “गेन-ऑफ-फंक्शन” रिसर्च जैसी संवेदनशील वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है, जिसे लेकर लंबे समय से वैश्विक स्तर पर बहस चल रही है।
क्या हैं आरोप?
रिपोर्ट्स और गबार्ड के दावों के मुताबिक:
- अमेरिका द्वारा विदेशी लैब्स में हाई-रिस्क रिसर्च को फंड किया गया
- वुहान लैब में कोरोना से जुड़े वायरस रिसर्च की फंडिंग हुई
- कुछ खुफिया आकलनों को कथित रूप से प्रभावित करने के आरोप भी लगे हैं
हालांकि, इन दावों पर वैज्ञानिक और राजनीतिक हलकों में भारी विवाद है और कई विशेषज्ञ इसे “अधूरी या विवादित व्याख्या” बताते हैं।
क्यों बढ़ा विवाद?
वुहान लैब पहले से ही कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में रही है। कुछ एजेंसियां लैब-लीक थ्योरी को संभावित मानती हैं, जबकि कई वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक उत्पत्ति की ओर अधिक झुकाव बताते हैं।
निष्कर्ष
तुलसी गबार्ड का यह दावा एक बार फिर कोविड-19 की उत्पत्ति और वुहान लैब फंडिंग को लेकर वैश्विक बहस को तेज कर रहा है। हालांकि अभी तक इन आरोपों पर अंतिम वैज्ञानिक सहमति नहीं बन पाई है।



