
दुनिया को स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाने की वैश्विक कोशिशों के बीच भारत और चीन सबसे सक्रिय देशों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों ने सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिससे ऊर्जा संक्रमण की रफ्तार तेज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, हरित तकनीकों को अपनाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में भारत और चीन ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि दुनिया के कई अन्य देश ऊर्जा परिवर्तन के अपने घोषित लक्ष्यों से पीछे चल रहे हैं। निवेश की कमी, नीतिगत अनिश्चितता, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां इस धीमी प्रगति के प्रमुख कारण बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी नहीं लाई गई, तो जलवायु परिवर्तन से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करना और कठिन हो जाएगा।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया है। वहीं चीन दुनिया का सबसे बड़ा सौर पैनल और बैटरी निर्माता होने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार में भी अग्रणी बना हुआ है। इन दोनों देशों की पहल ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हरित तकनीकों की लागत कम करने और निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अन्य देश भी ऊर्जा संक्रमण की रफ्तार नहीं बढ़ाते हैं, तो वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा सिर्फ पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में दुनिया को जलवायु लक्ष्यों और ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए अधिक आक्रामक कदम उठाने होंगे।



