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Annu Kapoor Exclusive: ‘सच बोलने की कोशिश की तो बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया’

हिंदी सिनेमा के मंझे हुए अभिनेता अन्नू कपूर उन कलाकारों में हैं जिन्होंने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। वह सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि अपनी बेबाक राय और स्पष्ट विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। हालिया बातचीत में उन्होंने अपने करियर, संघर्ष और उन विवादों पर बात की, जो उनके कुछ बयानों के बाद खड़े हुए। उनका कहना है कि कई बार उन्होंने जो कहा, उसका पूरा संदर्भ सामने नहीं आया और उनके शब्दों को अलग तरीके से पेश कर दिया गया।

‘सच बोलने की कोशिश की, लेकिन बयानों को तोड़-मरोड़ दिया’
अन्नू कपूर ने बातचीत में इस बात पर नाराजगी जताई कि कई मौकों पर उनके बयान उनके मूल संदर्भ से अलग करके पेश किए गए। उनका कहना है कि वह अपनी बात खुलकर रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब किसी बयान का एक हिस्सा ही सामने आता है तो उसका अर्थ बदल सकता है। इसी वजह से उनके नाम से विवाद भी खड़े हुए।

अभिनेता का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की बात को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है। उनके अनुसार, सिर्फ किसी एक लाइन या वाक्य को उठाकर राय बना लेना सही तरीका नहीं है।

धर्म और आस्था पर भी साफ कर चुके हैं अपना रुख
हाल में अन्नू कपूर ने अपनी फिल्म और निजी विचारों को लेकर भी स्पष्ट किया था कि वह खुद को नास्तिक मानते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह किसी धर्म या किसी की आस्था का अपमान करते हैं। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अलग-अलग मान्यताओं और ज्योतिष जैसी चीजों के बारे में किताबें जिज्ञासा और ज्ञान बढ़ाने के लिए पढ़ी हैं।

उनके मुताबिक, एक अभिनेता की निजी मान्यताओं और उसके निभाए किरदार को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। इसी सोच के कारण उन्होंने ‘उत्तर दा पुत्तर’ में ऐसा किरदार स्वीकार किया, जो उनकी वास्तविक सोच से काफी अलग है।

‘उत्तर दा पुत्तर’ में निभाया बिल्कुल अलग किरदार
अन्नू कपूर इन दिनों ‘उत्तर दा पुत्तर’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में वह एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर का किरदार निभा रहे हैं, जिसका वास्तु और दूसरी मान्यताओं पर गहरा विश्वास है। अन्नू कपूर के मुताबिक, एक अभिनेता के तौर पर उन्हें ऐसे किरदार आकर्षित करते हैं जो उनकी निजी जिंदगी और सोच से बिल्कुल अलग हों।

फिल्म विज्ञान और अंधविश्वास के बीच टकराव को भी सामने रखती है। अन्नू कपूर के लिए यह किरदार इसलिए दिलचस्प था क्योंकि इससे उन्हें अपनी व्यक्तिगत सोच से अलग व्यक्तित्व को पर्दे पर जीने का मौका मिला।

दिल्ली में संघर्ष के दिन याद किए
अन्नू कपूर ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को भी याद किया। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाई के दौरान दिल्ली में बिताए समय का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौर में उनकी आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी। संघर्ष के दिनों में खाने तक की परेशानी का सामना करना पड़ा।

आज चार दशक से ज्यादा समय तक इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी वह अपने सफर को सिर्फ अपनी मेहनत का नतीजा नहीं मानते। वह अपनी उपलब्धियों के लिए शुक्रगुजार हैं और इसे किस्मत का भी हिस्सा मानते हैं।

‘अच्छा कंटेंट होगा तभी दर्शक आएंगे’
अन्नू कपूर ने बदलते फिल्म बिजनेस और दर्शकों की पसंद पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि आज दर्शकों के पास मनोरंजन के बहुत ज्यादा विकल्प हैं। ऐसे में सिर्फ स्टार पावर के भरोसे दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाना आसान नहीं है।

उनके मुताबिक, अगर फिल्म में अच्छा और दमदार कंटेंट होगा तभी दर्शक उसे देखने के लिए समय और पैसा खर्च करेंगे। वह गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियों को भी महत्व देते हैं।

‘स्टारडम को फिल्म का मालिक समझना भ्रम है’
अन्नू कपूर ने फिल्म इंडस्ट्री में स्टारडम और फीस को लेकर भी बेबाक टिप्पणी की है। उनका मानना है कि किसी कलाकार का बड़ा स्टार बन जाना उसे पूरी फिल्म का मालिक नहीं बना देता। उनके अनुसार, कुछ कलाकार यह मानने लगते हैं कि उनकी सफलता ही पूरी फिल्म की सफलता की गारंटी है, लेकिन यह सोच गलत हो सकती है।

उनका जोर इस बात पर है कि फिल्म एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें अभिनेता के साथ लेखक, निर्देशक, तकनीशियन और पूरी टीम की भूमिका होती है।

‘विकी डोनर’ से मिली राष्ट्रीय पहचान
अन्नू कपूर के करियर में ‘विकी डोनर’ एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। हालांकि, इससे पहले भी वह कई दशकों तक फिल्मों और टेलीविजन में लगातार काम कर चुके थे।

उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने सिर्फ एक तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं किया। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और चरित्र भूमिकाओं तक उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का अलग-अलग रूप दिखाया।

बेबाकी ही पहचान, लेकिन विवाद भी साथ आए
अन्नू कपूर की बातचीत का सबसे अहम पहलू यही है कि वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटते। लेकिन उनका कहना है कि बेबाकी की कीमत उन्हें कई बार विवादों के रूप में चुकानी पड़ी। वह मानते हैं कि किसी मुद्दे पर अपनी बात रखना और किसी की भावना को ठेस पहुंचाना दो अलग बातें हैं।

उनके हालिया बयानों से भी यही नजर आता है कि वह अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं को स्पष्ट करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही यह भी चाहते हैं कि उनके शब्दों को सही संदर्भ में समझा जाए।

कुल मिलाकर, अन्नू कपूर का यह इंटरव्यू उनके अभिनेता होने से कहीं आगे उनके व्यक्तित्व को समझने का मौका देता है। लंबा संघर्ष, काम के प्रति गंभीरता और अपनी बात खुलकर कहने की आदत—ये तीनों चीजें आज भी उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा हैं।

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