यूपी-जापान संबंधों में नया अध्याय, ग्रीन हाइड्रोजन और विश्व शांति पर साथ काम करेंगे यामानाशी-यूपी

उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग अब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। हाल ही में हुए UP-Japan Investment Meet 2026 में ग्रीन हाइड्रोजन को प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में शामिल किया गया। यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर इस क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई।
ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा सहयोग का प्रमुख आधार
यामानाशी के गवर्नर के मुताबिक, ग्रीन हाइड्रोजन सिस्टम के जरिए उत्तर प्रदेश और यामानाशी दोनों के विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को भी इससे जोड़ने की योजना है।
जापान की तकनीक से यूपी को फायदा
यामानाशी के प्रतिनिधिमंडल ने Power-to-Gas (P2G) तकनीक को भी प्रस्तुत किया। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल कर पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन तैयार किया जाता है। यूपी में इस तकनीक से जुड़ी पायलट परियोजना पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी और Kanadevia Corporation के सहयोग से प्रस्तावित पायलट परियोजना की feasibility study फरवरी 2027 तक पूरी करने और मार्च 2027 तक commercialisation की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।
यूपी ने रखा बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में हर साल 1 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके लिए निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और भूमि संबंधी सुविधाओं जैसे प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
IIT Kanpur और IIT (BHU) Varanasi में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े Centre of Excellence भी स्थापित किए गए हैं, ताकि रिसर्च और नई तकनीकों को औद्योगिक स्तर तक पहुंचाया जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा से विश्व शांति तक
यामानाशी के गवर्नर ने सहयोग को केवल कारोबार और निवेश तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के जरिए विश्व शांति में योगदान देने की इच्छा जताई। उनका संदेश यह है कि स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था भविष्य में आर्थिक विकास के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता में भी भूमिका निभा सकती है।
काशी से जुड़ा सांस्कृतिक रिश्ता भी
कोटारो नागासाकी जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। मंदिर में जापानी मेहमानों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यूपी की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था की भी सराहना की।
निवेश और रोजगार के भी खुलेंगे रास्ते
ग्रीन हाइड्रोजन के साथ यूपी-जापान सहयोग का असर उद्योग, तकनीक और रोजगार पर भी पड़ सकता है। हालिया निवेश बैठक में जापानी कंपनियों के साथ ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई है।
निष्कर्ष: यूपी और यामानाशी के बीच संबंध अब पारंपरिक निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आगे बढ़कर ग्रीन हाइड्रोजन, तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा तक पहुंच रहे हैं। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो जापानी तकनीक और यूपी के बड़े औद्योगिक बाजार का मेल राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का नया इकोसिस्टम तैयार कर सकता है।



