पाकिस्तान की ‘रिलायंस’ कितनी बड़ी?

पाकिस्तान में ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में से एक Pak-Arab Refinery Limited (PARCO) को कई बार वहां की “रिलायंस” कहा जाता है। यह कंपनी पाकिस्तान के तेल शोधन और ईंधन आपूर्ति नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। PARCO की स्थापना पाकिस्तान और अबू धाबी (यूएई) की साझेदारी से हुई थी और देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी के जरिए पूरा होता है।
हालांकि यदि इसकी तुलना भारत की Reliance Industries से की जाए तो दोनों के बीच अंतर बेहद बड़ा दिखाई देता है। रिलायंस केवल तेल और पेट्रोकेमिकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि टेलीकॉम, रिटेल, डिजिटल सेवाओं, मीडिया और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में फैला एक विशाल समूह है। कंपनी भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में गिनी जाती है और वैश्विक स्तर पर भी उसकी मजबूत मौजूदगी है।
रिलायंस का कारोबार दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक, जामनगर रिफाइनरी, से लेकर Jio और रिटेल नेटवर्क तक फैला हुआ है। कंपनी का आकार, राजस्व और बाजार पूंजीकरण पाकिस्तान की किसी भी निजी कंपनी से कई गुना अधिक माना जाता है।
रूस से संबंधों की बात करें तो हाल के वर्षों में रिलायंस ने रियायती रूसी कच्चे तेल की बड़ी मात्रा खरीदी, जिससे उसकी रिफाइनिंग गतिविधियों को लाभ मिला। इस कारण कंपनी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की चर्चाओं में भी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तथाकथित “रिलायंस” अपने देश में भले ही रणनीतिक महत्व रखती हो, लेकिन आकार, विविध कारोबार, निवेश क्षमता और वैश्विक प्रभाव के मामले में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज उससे कई स्तर आगे है। यही वजह है कि दोनों कंपनियों की तुलना अधिकतर प्रतीकात्मक मानी जाती है, न कि वास्तविक कारोबारी पैमाने पर।



