
नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में ₹11.50 लाख जमा करने से जुड़े एक मामले में इनकम टैक्स विभाग ने करदाता पर जुर्माना लगाया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। विभाग का मानना था कि यह राशि संदिग्ध है और इसके लिए उचित स्रोत नहीं बताया गया, जिसके आधार पर टैक्स और पेनल्टी लगाई गई थी।
हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने करदाता के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया और पहले लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज और परिस्थितियों को देखते हुए यह राशि वैध स्रोतों से संबंधित हो सकती है।
यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बैंक में जमा की थी और बाद में टैक्स विभाग की जांच का सामना करना पड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय टैक्स मामलों में सबूतों और परिस्थितियों के महत्व को और स्पष्ट करता है।
इस फैसले से ऐसे कई लंबित मामलों पर भी असर पड़ सकता है, जहां नोटबंदी के दौरान जमा की गई नकदी को लेकर टैक्स विवाद चल रहे हैं।



