रूस ने तेल संकट में भारत की मदद की: आंद्रेई रुडेंको का बयान

रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने कहा है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद जब ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, तब रूस से मिलने वाले कच्चे तेल ने भारत की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने रूस को मुश्किल भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपने साझेदारों की मांग पूरी करने में सक्षम भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बताया।
रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़कर करीब 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया था। उस समय यह भारत के कुल तेल आयात का लगभग आधा था। बाद के महीनों में रूसी तेल की खरीद में कमी आई, जबकि भारत ने इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं से भी आयात बढ़ाया।
रुडेंको का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित टैरिफ का दबाव बना हुआ है। वहीं, भारत सरकार लगातार कहती रही है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई स्रोतों से आपूर्ति बनाए रखना जरूरी है।
सितंबर 2026 में उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के अनुसार भारत में रूसी कच्चे तेल की खरीद करीब 1.8–1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास रही। यानी रूस अभी भी भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है, लेकिन आयात स्तर साल के शुरुआती महीनों की तुलना में बदल चुका है।



