रुपया 96.53/$ तक क्यों टूटा? रिकॉर्ड गिरावट से क्यों बढ़ी देश की चिंता

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.53 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे बाजार और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ गई है। लगातार गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत पर दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग तेजी से बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ने लगता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी रुपये पर भारी पड़ रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर मजबूत होने से निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर जा रहे हैं, जिससे भारतीय करेंसी पर दबाव और बढ़ गया है।
कमजोर रुपये का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, विदेश यात्रा और आयातित सामान महंगे हो सकते हैं, जबकि महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
हालांकि Reserve Bank of India बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तेल की कीमतें ऊंची रहीं और वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।



