
ईरान में पिछले एक महीने से 16 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं और वे लगातार भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। ये नाविक एक व्यापारिक जहाज पर कार्यरत थे, जो तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से ईरानी बंदरगाह पर रुक गया। जहाज के रुकते ही इन नाविकों की स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती चली गई। सीमित संसाधन, वेतन न मिलना, मानसिक तनाव और अनिश्चित भविष्य ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है। परिवारजन भारत में लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इन नाविकों के पास न तो पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं और न ही वे स्वतंत्र रूप से भारत लौटने की स्थिति में हैं। लंबे समय तक जहाज पर या बंदरगाह के आसपास फंसे रहने के कारण उनकी सेहत और मनोबल दोनों पर असर पड़ा है। कई नाविकों ने वीडियो और संदेशों के माध्यम से अपनी परेशानी साझा की है, जिससे मामला सार्वजनिक रूप से सामने आया।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय लगातार ईरान में स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में है। दूतावास के अधिकारी नाविकों से सीधे संवाद कर रहे हैं और उनकी आवश्यक जरूरतों की व्यवस्था कराई जा रही है। साथ ही जहाज के मालिक और संबंधित शिपिंग कंपनी से भी बातचीत की जा रही है, ताकि कानूनी और तकनीकी अड़चनों को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके।
सरकार का प्रयास है कि सभी नाविकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। इसके लिए ईरानी प्रशासन के साथ समन्वय बढ़ाया गया है और यात्रा से जुड़े दस्तावेजों, वीज़ा औपचारिकताओं तथा जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर विशेष उड़ान या वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर विदेशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा सामने लाता है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि संकट में फंसे हर भारतीय की मदद करना उसकी प्राथमिकता है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में सकारात्मक समाधान निकलकर ये सभी नाविक सुरक्षित अपने घर लौट सकेंगे और उनके परिवारों की चिंता भी दूर होगी।



