
भारत की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने के प्रयासों के तहत पिछले पांच वर्षों में बड़ी संख्या में प्राचीन धरोहरें देश में वापस लाई गई हैं। सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि इस अवधि में 615 प्राचीन धरोहरें (Antiquities) विदेशों से भारत लाई गईं।
इन धरोहरों में मूर्तियां, कलाकृतियां, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं और अन्य ऐतिहासिक सामग्री शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इन वस्तुओं को वापस लाने के लिए विभिन्न देशों के साथ राजनयिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
भारतीय पुरावशेषों की वापसी का अभियान सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़ा हुआ है। कई प्राचीन वस्तुएं चोरी, अवैध तस्करी या अन्य माध्यमों से देश से बाहर पहुंच गई थीं, जिन्हें अब कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के जरिए वापस लाया जा रहा है।
संस्कृति मंत्रालय भारतीय विरासत और पुरावशेषों के संरक्षण से जुड़े कार्यों का समन्वय करता है। मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां विदेशों में मौजूद भारतीय धरोहरों की पहचान और वापसी के लिए काम करती हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों से ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं वापस हासिल की हैं। इनमें प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व की कलाकृतियां भी शामिल रही हैं।
सरकार का कहना है कि प्राचीन धरोहरों की वापसी केवल ऐतिहासिक वस्तुओं को वापस लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



