
79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को एक सीधा और कड़ा संदेश दिया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “भारत किसी भी प्रकार का परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं करेगा”। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि हाल के महीनों में पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियारों को लेकर दिए गए कई उकसावे भरे बयानों ने तनाव को बढ़ाया था।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज का भारत शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र है, जो किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत शांति का समर्थक है, लेकिन उसकी सहनशीलता को कमजोरी समझने की भूल न की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सेनाएं और वैज्ञानिक किसी भी खतरे का मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैयार है, बल्कि अब रक्षा उत्पादन में भी आत्मनिर्भर बन रहा है। ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, और उन्नत लड़ाकू विमानों के स्वदेशी निर्माण की उपलब्धियों को उन्होंने गर्व से गिनाया।
पीएम मोदी ने यह भी दोहराया कि भारत की विदेश नीति स्पष्ट है — “शांति की पहल के साथ-साथ सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं”। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, घुसपैठ और सीमा पर उकसावे वाली गतिविधियों के खिलाफ भारत का रुख सख्त रहेगा।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने युवाओं को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश के भविष्य की गारंटी है। उन्होंने टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
अंत में, प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास चुनौतियां हैं, लेकिन उनसे बड़ी हमारी इच्छाशक्ति है। एक मजबूत और सुरक्षित भारत बनाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।”
लाल किले से दिए गए इस संबोधन ने न केवल देशवासियों में उत्साह और गर्व की भावना जगाई, बल्कि दुनिया को भी यह संदेश दे दिया कि भारत अब किसी भी तरह के परमाणु या सैन्य दबाव के आगे नहीं झुकेगा। यह भाषण आने वाले समय में भारत की रक्षा और विदेश नीति के रुख को तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।



