
अफगानिस्तान इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। देश के कई प्रांतों में लगातार हो रही भारी बारिश और बर्फबारी ने तबाही मचा दी है। बीते तीन दिनों में अलग-अलग हादसों और प्राकृतिक कारणों से कम से कम 61 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। अचानक बदले मौसम ने न केवल जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, बल्कि सैकड़ों घर पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, उत्तरी और मध्य अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है। सड़कों पर बर्फ जमने और भूस्खलन की वजह से राहत एवं बचाव कार्यों में भारी दिक्कतें आ रही हैं। कुछ क्षेत्रों में लोग अब भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
बारिश के चलते कई जगहों पर अचानक बाढ़ आ गई, जिसने कच्चे मकानों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। अफगानिस्तान में बड़ी आबादी ऐसे घरों में रहती है, जो अत्यधिक बारिश या बर्फबारी को सहन नहीं कर पाते। नतीजतन, सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें खुले आसमान के नीचे शरण लेनी पड़ रही है। ठंड बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
आपदा के बाद मानवीय संकट गहराता जा रहा है। पहले से ही आर्थिक तंगी, खाद्य संकट और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए यह आपदा एक और बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। राहत एजेंसियों का कहना है कि कई इलाकों में भोजन, गर्म कपड़ों और दवाइयों की तत्काल जरूरत है। हालांकि, दुर्गम इलाकों और खराब मौसम के कारण सहायता पहुंचाना आसान नहीं हो पा रहा है।
अफगान प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कदम उठाने की बात कही है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में और बारिश व बर्फबारी की चेतावनी दी है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहायता और तेज़ राहत कार्य ही इस संकट से निपटने का सबसे बड़ा सहारा माने जा रहे हैं।


