
अमेरिका इन दिनों एक भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में है, जिसने देश के कई हिस्सों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस शीत तूफान के चलते भारी बर्फबारी, तेज़ हवाएं और अत्यधिक ठंड दर्ज की जा रही है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई राज्यों में आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित करनी पड़ी है। लाखों लोगों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के मिडवेस्ट और पूर्वी हिस्सों में तूफान का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। बर्फ की मोटी परत जमने से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में हाईवे बंद कर दिए गए हैं और लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करें।
इस बर्फीले तूफान का सबसे बड़ा असर हवाई सेवाओं पर पड़ा है। अब तक 13 हजार से ज्यादा फ्लाइट्स को रद करना पड़ा है, जबकि हजारों उड़ानों में देरी हुई है। प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई यात्री घंटों तक एयरपोर्ट पर फंसे रहे, वहीं कुछ को अपनी यात्रा रद करनी पड़ी। एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लें।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से ठंड में लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई घरों में हीटिंग सिस्टम बंद हो गए हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को खास तौर पर दिक्कत हो रही है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। शेल्टर होम्स खोले गए हैं, जहां बिना बिजली और हीटिंग वाले लोगों को अस्थायी रूप से ठहराया जा रहा है।
मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक हालात पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद कम है। कुछ राज्यों में और अधिक बर्फबारी तथा तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, गर्म कपड़े पहनने और आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। यह तूफान एक बार फिर दिखाता है कि प्राकृतिक आपदाएं किस तरह आधुनिक व्यवस्थाओं को भी चुनौती दे सकती हैं।



