
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस भू-राजनीतिक संकट के बीच सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित संपत्ति बनकर उभरा है और इसकी मार्केट वैल्यू ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में मौजूद सोने की कुल मार्केट वैल्यू इतनी बढ़ चुकी है कि यह भारत और यूनाइटेड किंगडम की संयुक्त GDP से भी करीब पांच गुना ज्यादा बताई जा रही है। जैसे-जैसे युद्ध का खतरा बढ़ता है, निवेशक शेयर बाजार और जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार मजबूत बनी हुई है और कई देशों के केंद्रीय बैंक भी अपने गोल्ड रिजर्व में तेजी से इजाफा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प बन जाता है। इजरायल-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका ने सोने की मांग को और बढ़ा दिया है। भारत जैसे देशों में तो सोने का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व पहले से ही बहुत अधिक है, लेकिन अब वैश्विक निवेशक भी इसे “सेफ हेवन” के रूप में देख रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में निकाले गए कुल सोने का मूल्य कई दर्जन ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है, जो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के आकार से भी बड़ा है।
इसी वजह से विश्लेषक सोने को अब सिर्फ एक कीमती धातु नहीं बल्कि “सुपरपावर एसेट” भी कहने लगे हैं। यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जैसे ही भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य होगी, तब सोने में हल्का सुधार भी आ सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति और बड़े देशों की नीतियों पर टिकी हुई है। ऐसे समय में सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे भरोसेमंद संपत्तियों में से एक बनकर उभरा है, जो वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में निवेशकों को सुरक्षा का भरोसा दे रहा है।



