
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में रूस ने यूक्रेन पर एक साथ करीब 90 ड्रोन दागे, जिससे कई शहरों में भारी नुकसान हुआ। इस हमले की सबसे चौंकाने वाली घटना एक प्रसूति अस्पताल में आग लगने की रही, जहां इलाज के लिए भर्ती गर्भवती महिलाएं मौजूद थीं। ड्रोन हमले के बाद अस्पताल के एक हिस्से में भीषण आग फैल गई, जिसमें कम से कम तीन महिलाओं के घायल होने की पुष्टि हुई है। राहत की बात यह रही कि समय रहते अस्पताल स्टाफ और बचाव दल ने अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, वरना जनहानि और भी ज्यादा हो सकती थी।
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूसी ड्रोन हमलों का मुख्य निशाना रिहायशी इलाके और नागरिक बुनियादी ढांचा रहा। राजधानी समेत कई प्रमुख शहरों में सायरन बजते रहे और लोग देर रात तक बंकरों में छिपने को मजबूर हुए। यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन बड़ी संख्या में ड्रोन होने के कारण कुछ अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। इससे बिजली आपूर्ति, अस्पतालों और आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा।
प्रसूति अस्पताल पर हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। नागरिक ठिकानों, खासकर अस्पतालों पर हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस जानबूझकर आम नागरिकों में डर फैलाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, रूस की ओर से हमेशा की तरह दावा किया गया है कि उसके हमले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
इस हमले के बाद यूक्रेन में मानवीय संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है। सर्द मौसम, बिजली कटौती और लगातार हो रहे हमलों के बीच आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन ने एक बार फिर अधिक सैन्य और मानवीय सहायता की अपील की है। कुल मिलाकर, 90 ड्रोन से किया गया यह हमला न सिर्फ युद्ध की तीव्रता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि इस संघर्ष में आम लोग सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।



