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ईरान-चीन डील से बदलेगा शक्ति संतुलन? सुपरसोनिक मिसाइलें कितनी खतरनाक और क्या होगा अमेरिका का कदम

मिडिल ईस्ट की राजनीति एक बार फिर वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बनती दिख रही है। अगर चीन ईरान को सुपरसोनिक मिसाइल तकनीक देने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इसका सीधा असर अमेरिका की रणनीति पर पड़ेगा, खासकर तब जब Donald Trump दोबारा वैश्विक मंच पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में हों। सुपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार से लक्ष्य भेदने में सक्षम होती हैं, जिससे दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम रह जाता है। ईरान पहले ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के निशाने पर रहा है, और यदि उसे चीन जैसी बड़ी ताकत का तकनीकी सहयोग मिलता है तो खाड़ी क्षेत्र में सैन्य समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।

चीन और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है। 25 साल के व्यापक सहयोग समझौते के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में गहरे रिश्ते बने हैं। यदि बीजिंग उन्नत मिसाइल तकनीक साझा करता है, तो इससे ईरान की मारक क्षमता और सटीकता दोनों में इजाफा होगा। सुपरसोनिक हथियारों की खासियत यह है कि वे पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम माने जाते हैं। ऐसे में सऊदी अरब, इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं।

अमेरिका लंबे समय से ईरान पर प्रतिबंध और कूटनीतिक दबाव की नीति अपनाता रहा है। Iran यदि अत्याधुनिक सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस होता है, तो यह न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि भूमध्यसागर तक रणनीतिक प्रभाव बढ़ा सकता है। वहीं China के लिए यह कदम अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने का साधन बन सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी किसी भी डील से मिडिल ईस्ट में हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी।

हालांकि अभी तक इस तरह की डील पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर यह परिकल्पना साकार होती है तो इसका असर वैश्विक राजनीति पर दूरगामी होगा। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा पहले से ही तीखी है, और ईरान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तकनीकी सहयोग से टकराव और गहरा सकता है। कुल मिलाकर, सुपरसोनिक मिसाइलें सिर्फ सैन्य ताकत का प्रतीक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक दबाव का भी बड़ा साधन बन सकती हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन नई दिशा ले सकता है।

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