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बांग्लादेश ने उत्तरपूर्वी राज्यों को अपना बताया, नक्शे पर बढ़ा विवाद | भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद

भारत और बांग्लादेश के बीच हाल ही में नया विवाद उस समय सामने आया जब बांग्लादेश की एक सरकारी एजेंसी द्वारा जारी किए गए संशोधित नक्शे में भारत के कुछ उत्तरपूर्वी राज्यों—असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा—को अपने क्षेत्र का हिस्सा दिखाया गया। इस नक्शे के जारी होते ही भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और इसे भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सीधा हमला माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के एक मंत्रालय ने “ग्रेटर बांग्लादेश” के नाम से एक मानचित्र प्रकाशित किया, जिसमें इन राज्यों के कुछ हिस्सों को ऐतिहासिक रूप से ‘पूर्वी बंगाल’ का हिस्सा बताया गया। इस कदम की भारत सरकार ने कड़ी निंदा की है और ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी देश इस तरह की भ्रामक और असत्य प्रस्तुति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को चुनौती नहीं दे सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह नक्शा केवल राजनीतिक प्रचार या आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य बांग्लादेश की जनता के बीच राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना है। हालांकि, भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम से दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रिश्तों में दरार आ सकती है।

भारत और बांग्लादेश ने 2015 में सीमा विवाद सुलझाने के लिए लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट (LBA) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सीमाओं का निर्धारण स्पष्ट हो गया था। ऐसे में इस नए नक्शे का सामने आना न केवल उस समझौते की भावना के खिलाफ है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी खतरा पैदा करता है।

भारत सरकार ने कहा है कि वह किसी भी तरह की भू-राजनीतिक शरारत को बर्दाश्त नहीं करेगी और आवश्यक होने पर राजनयिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अगर समय रहते शांत नहीं हुआ तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया तनाव पैदा कर सकता है, जिससे दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थिति पर व्यापक असर पड़ेगा।

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