
ईरान में एक बार फिर सत्ता और जनता के बीच टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने कड़ा दमन किया, जिसमें अब तक 217 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सख्त निर्देशों के बाद तेज हुई। प्रदर्शनकारी महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं की आज़ादी पर पाबंदियों और राजनीतिक दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक टकराव में बदल गए, जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, रबर बुलेट और बाद में कथित तौर पर लाइव फायरिंग का सहारा लिया। कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, ताकि सूचनाओं का प्रवाह रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचा जा सके। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई इलाकों में बिना किसी चेतावनी के गोलियां चलाई गईं, जिससे महिलाओं और युवाओं समेत बड़ी संख्या में लोग मारे गए। ईरानी सरकार ने हालांकि मौतों के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाना करार दिया है और कहा है कि सुरक्षा बलों ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस दमन की कड़ी निंदा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। विश्लेषकों के मुताबिक, खामेनेई के नेतृत्व में ईरानी शासन किसी भी तरह की राजनीतिक चुनौती को सख्ती से कुचलने की नीति अपनाए हुए है, क्योंकि उसे डर है कि लगातार बढ़ता असंतोष सत्ता की जड़ों को हिला सकता है। वहीं, पश्चिमी देशों ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं, जिससे पहले से संकटग्रस्त ईरानी अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार बल के सहारे जनता की आवाज को लंबे समय तक दबा पाएगी, या यह दमन आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलन की वजह बनेगा।



