
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर चीन ने एक बार फिर तीखा सियासी व्यंग्य किया है। इस बार चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक AI से बनाया गया वीडियो वायरल किया गया, जिसमें ट्रंप को कार्टूननुमा अंदाज़ में यह कहते हुए दिखाया गया कि “मैं जो चाहे वो करूं, मेरी मर्जी।” इस वीडियो को चीन समर्थक कई अकाउंट्स ने शेयर किया और अमेरिका की राजनीति व ट्रंप की नीतियों पर तंज कसा। वीडियो सामने आते ही यह अमेरिका-चीन संबंधों की मौजूदा तल्खी का नया प्रतीक बन गया है। दरअसल, पिछले कुछ समय से व्यापार, टेक्नोलॉजी, ताइवान और वैश्विक राजनीति को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान तेज होती जा रही है, और अब डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस टकराव का मैदान बनते दिख रहे हैं। AI वीडियो में ट्रंप को अति-आत्मविश्वासी और तानाशाही रवैये में दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वह नियमों और अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओं की परवाह नहीं करते। चीन की ओर से इस तरह का व्यंग्य अमेरिका की विदेश नीति और ट्रंप के पिछले कार्यकाल की आलोचना के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह वीडियो किसी आधिकारिक चीनी सरकारी चैनल से नहीं, बल्कि सरकार समर्थक प्रभावशाली अकाउंट्स से शेयर किया गया, जिससे इसे “डिजिटल प्रोपेगेंडा” का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से राजनीतिक व्यंग्य और दुष्प्रचार के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। ट्रंप पहले भी चीन पर आर्थिक दबाव, टैरिफ और टेक कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने जैसी नीतियों के कारण बीजिंग के निशाने पर रहे हैं। ऐसे में यह AI वीडियो सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश भी है कि चीन अब पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ डिजिटल हथियारों का भी इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिका में इस वीडियो को लेकर आलोचना भी शुरू हो गई है और कुछ लोगों ने इसे फेक कंटेंट फैलाने की कोशिश बताया है। वहीं, सोशल मीडिया पर ट्रंप समर्थक इसे चीन की हताशा करार दे रहे हैं। कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति सिर्फ नेताओं के भाषणों और बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि AI और सोशल मीडिया भी बड़े सियासी हथियार बनते जा रहे हैं, जहां एक वीडियो भी अंतरराष्ट्रीय बहस को भड़का सकता है।
