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प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को राहत की मांग, बिजली न मिलने पर 50 रुपये रोजाना मुआवजा देने की उठी आवाज

उत्तर प्रदेश में प्रीपेड बिजली मीटर और रिचार्ज व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर में समय पर रिचार्ज कराने के बावजूद बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है या फिर घंटों तक बिजली नहीं मिलती। इस समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और मांग की है कि यदि रिचार्ज के बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिलती है तो उन्हें प्रतिदिन 50 रुपये का मुआवजा दिया जाए।

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में घरों और संस्थानों में प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली बिलिंग को पारदर्शी बनाना और बकाया की समस्या को खत्म करना था। लेकिन कई जगहों पर तकनीकी खामियों और नेटवर्क समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में उपभोक्ता ने समय पर रिचार्ज कराया, लेकिन सिस्टम में अपडेट नहीं होने से बिजली सप्लाई बंद हो गई। इससे लोगों को घंटों तक अंधेरे में रहना पड़ता है।

परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि जब उपभोक्ता पहले से भुगतान कर चुका है तो बिजली न मिलना सीधे तौर पर सेवा में कमी माना जाएगा। ऐसे में बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उपभोक्ताओं को उचित मुआवजा दें। परिषद ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि किसी तकनीकी कारण या सिस्टम फेल होने की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तो उस अवधि का हिसाब लगाकर उपभोक्ता को प्रतिदिन 50 रुपये का मुआवजा दिया जाए।

उपभोक्ता परिषद का यह भी कहना है कि कई बार ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में नेटवर्क समस्या की वजह से रिचार्ज की जानकारी मीटर तक समय पर नहीं पहुंचती। इससे बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है और उपभोक्ताओं को बार-बार शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। परिषद ने बिजली विभाग से मांग की है कि ऐसे मामलों के लिए एक त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली बनाई जाए, ताकि उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिल सके।

इस मुद्दे को लेकर परिषद जल्द ही ऊर्जा विभाग और बिजली वितरण कंपनियों के साथ बैठक करने की भी तैयारी कर रहा है। परिषद का मानना है कि यदि उपभोक्ताओं को समय पर बिजली नहीं मिलती और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। मुआवजे की व्यवस्था लागू होने से बिजली कंपनियां भी अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बाध्य होंगी।

प्रदेश में प्रीपेड मीटर व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधार और पारदर्शी सिस्टम की जरूरत बताई जा रही है। उपभोक्ता परिषद की इस मांग को आम उपभोक्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है, क्योंकि इससे बिजली सेवाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।

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