
देश आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह, गर्व और राष्ट्रभक्ति के माहौल में मना रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत उस ऐतिहासिक क्षण से हुई, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु परेड में शामिल होने के लिए कर्तव्य पथ पहुंचीं। इस अवसर पर उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस वर्ष के मुख्य अतिथि भी मौजूद रहे। तीनों गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। कर्तव्य पथ पर जैसे ही राष्ट्रपति मुर्मु का काफिला पहुंचा, वहां मौजूद हजारों दर्शकों ने तालियों और देशभक्ति नारों के साथ उनका स्वागत किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने परंपरा के अनुसार सलामी मंच से सशस्त्र बलों की परेड की सलामी ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पारंपरिक परिधान में नजर आए और उन्होंने भी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्य अतिथि की मौजूदगी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खास बना दिया, जिससे भारत की वैश्विक छवि और मजबूत होती दिखाई दी। परेड में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियों ने अनुशासन और शौर्य का अद्भुत प्रदर्शन किया। आधुनिक हथियार प्रणालियों और स्वदेशी रक्षा तकनीक की झलक ने आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दर्शाया।
इसके साथ ही विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोककलाओं, परंपराओं और विकास गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। हर झांकी में “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। स्कूली बच्चों और कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। देशभक्ति गीतों और नृत्यों के माध्यम से भारत की एकता और अखंडता का संदेश दिया गया।
77वां गणतंत्र दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की ताकत और नागरिकों की एकजुटता का प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मु, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि भारत न केवल अपनी परंपराओं पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह दिन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है कि वह देश के विकास, एकता और समृद्धि में अपना योगदान दे।



