
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कथित तौर पर ईरान में ‘वेनेजुएला मॉडल’ लागू करने की बात कही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मच गई है। ‘वेनेजुएला मॉडल’ से आशय उस रणनीति से है, जिसे अमेरिका ने Venezuela में राष्ट्रपति Nicolás Maduro के खिलाफ अपनाया था—यानी कड़े आर्थिक प्रतिबंध, विपक्षी नेतृत्व को खुला समर्थन और अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश। माना जा रहा है कि ट्रंप की यह सोच ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर Ali Khamenei पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में सत्ता संरचना वेनेजुएला से काफी अलग है, जहां अंतिम निर्णय का अधिकार सुप्रीम लीडर के पास होता है। ऐसे में ‘वेनेजुएला मॉडल’ को हूबहू लागू करना आसान नहीं होगा। हालांकि, ट्रंप के करीबी रणनीतिकारों का मानना है कि कड़े प्रतिबंधों, तेल निर्यात पर नियंत्रण और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ तालमेल से तेहरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाया जा सकता है। इसी बीच कुछ नामों को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं, जिन्हें भविष्य के संभावित नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है। इनमें ईरान के राष्ट्रपति Ebrahim Raisi (पूर्व), पूर्व विदेश मंत्री Mohammad Javad Zarif और प्रभावशाली धार्मिक नेता Mojtaba Khamenei का नाम चर्चा में बताया जा रहा है।
हालांकि इन नामों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन यह साफ है कि ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए किसी भी बाहरी ‘मॉडल’ को लागू करना बेहद जटिल होगा। रूस और चीन जैसे देशों का समर्थन, मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक तेल बाजार पर असर जैसे कई कारक इस रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल ट्रंप के बयान ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों को सुर्खियों में ला दिया है और आने वाले समय में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति का अहम केंद्र बन सकता है।


