
म्यांमार में सोमवार सुबह भूकंप के तेज झटकों से लोग दहशत में आ गए। भूकंप का असर इतना तेज था कि इसके झटके भारत के कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 के आसपास दर्ज की गई। इसका केंद्र म्यांमार के उत्तर-पश्चिमी इलाके में था, जो भारत की सीमा से ज़्यादा दूर नहीं है। झटके सुबह के समय आए, जब अधिकतर लोग अपने घरों में थे। अचानक धरती हिलने से लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे।
भारत के मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और असम जैसे राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है और यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। खासकर म्यांमार और भारत की सीमा से जुड़े इलाके भूकंप के लिए “हाई रिस्क जोन” माने जाते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। राहत और बचाव टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने झटकों का अनुभव साझा किया है और तस्वीरें व वीडियो डालकर बताया कि कैसे अचानक दीवारें और फर्नीचर हिलने लगे।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप के लगातार आने वाले झटके यह संकेत हैं कि धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। फिलहाल राहत की बात यह है कि बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आफ्टरशॉक्स यानी हल्के झटके आने की संभावना बनी रह सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत और पड़ोसी देशों को भूकंप से निपटने के लिए और मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर व जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है। खासकर पूर्वोत्तर भारत, जो पहले से ही भूकंपीय क्षेत्र 5 में आता है, वहां भूकंप से सुरक्षा के लिए सतर्कता और ज़्यादा जरूरी हो जाती है।



